life is seen returning to the tracks but the migration of workers is not stopping | 55 दिन बाद पटरी पर लौटती दिखी जिंदगी लेकिन नहीं रुक रहा मजदूरों का पलायन

दैनिक भास्कर

May 19, 2020, 08:13 AM IT

नई दिल्ली. सोमवार को 55 दिन से जारी लॉकडाउन का चौथा चरण शुरू हुआ। अधिकांश राज्यों में सख्त पाबंदियां सिर्फ कंटेनमेंट जोन तक सीमित कर दी गईं। दिल्ली, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, केरल, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु समेत 13 राज्यों ने कंटेनमेंट जोन को छोड़कर सभी इलाकों में आर्थिक गतिविधियां शुरू कर दीं। लॉकडाउन में ढील मिलते ही एक तरह तो जीवन पटरी पर लौटता नजर आ रहा है, वहीं मजदूरों का पलायन अब भी जारी है। मजदूर आज भी सड़कों पर है। लोग लगातार घर लौटने की जद्दोजहद में लगे हैं। वहीं, प्रवासियों के पलायन पर यूपी में प्रियंका गांधी और प्रदेश सरकार में आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति भी तेज हो गई है। लेकिन इस सब के बीच उनका दर्द कम होता नहीं दिख रहा।  देखिए राहत और दर्द की तस्वीरें…

विभाजन की याद दिलाती है मजदूरों के पलायन की तस्वीरें

देशभर की सड़कों, राष्ट्रीय राजमार्गों पर आज एक ही तस्वीर दिखती है। सिर पर भुखमरी और मजबूरियों का बोझ उठाए मजदूर देश के आर्थिक केंद्रों से अपने गांवों की तरफ लौट रहे हैं। राज्यों के दावों के बावजूद बसों और ट्रेनों के बजाय सड़क पर पैदल निकले या किसी ट्रक-लोडिंग वाहन में मजदूर ज्यादा दिख रहे हैं…हादसों का शिकार हो रहे हैं, फिर भी कदम थम नहीं रहे हैं। यहां दो तस्वीरें दी गई हैं। ऊपर दी गई ब्लैक एंड व्हाइट तस्वीर 1947 की है। देश विभाजन के समय शरणार्थियों से लदे एक ट्रक की। दूसरी तस्वीर में भी एक ट्रक में जानवरों की ठूंसे गए इंसान नजर आ रहे हैं…मगर ये त्रासदी 73 साल पुरानी नहीं, आज की है। मजदूरों और इनके परिवारों से इस कदर लदा यह ट्रक महाराष्ट्र से चला था…मंजिल हजारीबाग है। सोमवार को यह ट्रक रांची पहुंचा। सवार मजदूरों ने बताया कि सारे लोग हजारीबाग के ही रहने वाले हैं…महाराष्ट्र में काम करते थे। अब काम नहीं है…यूं घर लौटना मजबूरी है।
न जेब में रुपए, न खाना

न जेब में रुपए, न खाना इन प्रवासियों की सबसे बड़ी परेशानी यह भी है कि यह अपने किराए के मकान खाली कर वापस आ जाते हैं। कई-कई दिनों तक स्क्रीनिंग सेंटर के आसपास परिवारों के साथ रहते हैं। अगर पुलिस मुलाजिम इनको बोले कि उस समय तक अपने किराए के मकानों से न आओ जब तक उनको प्रशासन की तरफ से मोबाइल पर मैसेज न आए। लेकिन इस पर जवाब मिलता है कि मकान मालिक उनको दोबारा से घुसने नहीं देते। कई प्रवासी वापस गए थे, लेकिन मकान मालिकों ने उनको फटकार लगाकर वहां से भाग दिया। फिर एक महीने का पूरा किराया मांगते थे। कुछ लोगों का कहना है कि यहां पर काम करते थे, लेकिन मालिक ने निकाल दिया है। न ही खाने के लिए कुछ है और न जेब में रुपए हैं। ऐसे में घर लौटने के सिवाए उनके पास कोई विकल्प नहीं है। अब काफी समय से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन नंबर नहीं आया। अब तो गर्मी भी बढ़ने लगी है। सब्र का बांध टूटता जा रहा है।

खत्म नहीं हो रहा इंतजार

एक ओर आसमान आग बरसाने लगा है। सोमवार को 37 डिग्री तापमान के बाद भी यहां पीआर 7 के पास राधा स्वामी सत्संग भवन के बाहर सैकड़ों परिवार अपने छोटे बच्चों के साथ गोरखपुर जाने वाली ट्रेन में सीट मिलने का इंतजार करते रहे। फोटो-गीतांश गौतम

लॉकडाउन ने अस्पताल में ही कैद कर दिया

कैंसर का इलाज कराने आए 64 मरीज व उनके परिजन लॉकडाउन होने से पिछले 55 दिन से यहां फंसे हैं। मेडिकल कॉलेज परिसर में रेडक्रास ब्लड बैंक की पुरानी बिल्डिंग परिसर में रह रहे हैं। यहां ये परिवार रोजाना ऐसे ही समूह में अपने लिए बारी-बारी से चूल्हे में खाना बनाते हैं। सुबह साढ़े 6 बजे यह कवायद शुरू हो जाती है। अस्पताल प्रशासन की तरफ से यहां मरीजों के दूध और पानी गर्म करने के लिए गैस चूल्हे की व्यवस्था कराई गई है, जिसे तय समय में ही उपयोग के लिए लोगों को दिया जाता है। यह जरूर है कि यहां ठहरे लोगों को अलग-अलग सामाजिक संस्थाओं ने लॉक डाउन के दौरान चावल, आटा, सब्जी, फल, चटाई और मच्छरदानी दान में दी हैं। फोटो स्टोरी- संदीप राजवाड़े

छूट दे रही संक्रमण को दावत

सेामवार को बाजारों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती नजर आईं। यह नजारा गुना के सुगन चौराहे का है। तीनों सड़कें लोगों से ठसाठस भरी हैं। सबसे ज्यादा भीड़ कपड़ा बाजार के लिए थी। दुकानदार व जानकार कहते हैं कि तीन-तीन दिन दुकान खोलने का प्रयोग खास सफल नहीं हो पा रहा है। ज्यादातर दुकानें दोपहर एक बजे तक ही पूरी तरह खुल पाती हैं। अगर ऐसे ही नियम टूटते रहे तो संक्रमण के खतरे से बचना बहुत मुश्किल होगा।

छूट मिलते ही जाम हो गई दिल्ली

दिल्ली में सोमवार को बाजार खुलने के पहले दिन कुछ जगह जाम लगता दिखा। दिल्ली समेत देश के 160 शहरों में ओला की टैक्सियां चलनी शुरू हो गई हैं। उबर ने 31 शहरों में सेवा शुरू कर दी है।

55 दिन बाद दुकानें भी खुलीं, ग्राहक भी पहुंचे

चंडीगढ़ प्रशासन ने कंटेनमेंट जोन को छोड़कर लगभग पूरे शहर को खोल दिया है। 55 दिन से बंद पड़े काम आज से शुरू हो जाएंगे। मार्केट की दुकानों पर ऑड-ईवन सिस्टम लागू नहीं होगी। लेकिन सेक्टर-19,22 की जो रेहड़ी मार्केट है, उनमें ऑड-ईवन लागू होगा, क्योंकि यहां स्पेस कम है और भीड़ ज्यादा रहती है। तस्वीर सेक्टर-23 की है। जहां दुकानें खुलीं तो ग्रहक भी नजर आए। फोटो – जसविंदर सिंह

आधे कर्मचारियों के साथ शुरू हुआ काम

सरकार ने लॉकडाउन के साथ ढील देने का जो एलान किया है उसका असर सोमवार को मार्केट में दिखाई दिया। लोगों की तादात ज्यादा थी। महिलाएं भी सामान खरीदने के लिए पहुंची थी। 2 महीने बाद लॉकडाउन में जो छूट मिली है उसके चलते काफी महिलाएं दिखाई दे रही थी। सड़कों पर वाहनों की भरमार थी। हालांकि ऐसा नहीं कि चौक-चौराहों पर पुलिस नहीं थी। पुलिस थी, लेकिन किसी भी वाहन चालक या राहगीर को रोककर पूछताछ नहीं की जा रही थी।

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